Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2017

8.1 Promotion of marathi and sanskrit ( Veer shivaji )

8.1 Promotion of marathi and sanskrit
            ( Veer shivaji )



Though Persian was a common courtly language in the region, Shivaji replaced it with Marathi in his own court, and emphasised Hindu political and courtly traditions.The house of Shivaji was well acquainted with Sanskrit and promoted the language; his father Shahaji had supported scholars such as Jayram Pindye, who prepared Shivaji's seal. Shivaji continued this Sanskrit promotion, giving his forts names such as Sindhudurg, Prachandgarh, and Suvarndurg. He named the Ashta Pradhan (council of ministers) as per Sanskrit nomenclature with terms such as nyayadhish, and senapat, and commissioned the political treatise Rajyavyavahar Kosh. His rajpurohit, Keshav Pandit, was himself a Sanskrit scholar and poet.

shayari photos

letest shayari

RANI PADMAVATI KA PARICHAY PART 1

रानी पद्मावती का परिचय
भारतीय इतिहास के पन्नों  में  अत्यंत  सुंदर और साहसी रानी ;रानी पद्मावती का उल्लेख है रानी पद्मावती को  रानी पद्मनी के नाम से भी जाना जाता है रानी पद्मावती के पिता सिंघल प्रांत (श्रीलंका )के राजा थे ! 
उनका नाम गंधर्वसेन था ! और उनकी माता का नाम चंपावती था ! पद्मावती बाल्य काल से ही दिखने में अत्यंत ही सुन्दर और आकर्षक थी !उनके माता -पिता नें उन्हें बड़े लाड प्यार से बड़ा किया था ! कहा जाता है की बचपन में पद्मावती के पास एक बोलता तोता था जिसका नाम हीरामणि रखा गया  था !



रानी पद्मावती का स्वयंवर 

रानी पद्मावती का स्वयंवर महाराज गंधर्वसेन ने अपनी पुत्री पद्मावती के विवाह के लिए उनका स्वयंवर रचाया था जिसमे भाग लेने के लिए भारत के अलग -अलग हिन्दू राज्यों के राजा-महाराजा आये थे ! 
गंधर्वसेन के राज दरबार में लगी राजा -महाराजाओ की भीड़ में एक छोटे से राज्य का पराक्रमी राजा मल्खान सिंह भी आया था ! उसी स्वयवर में विवाहित राजा रावल रत्न सिंह भी मौजूद थे उन्होंने मल्खान सिंह को स्वयंवर में परास्त कर के रानी पद्मावती पर अपना अधिकार सिध्द किया और उनसे धूम -धाम से विवाह रचा लिया !इस त…