RANI PADMAWATI PART 4


अलाउद्दीन खिजली की चित्तोड़ राज्य पर  आक्रमण                                  की योजना                                                                                                                  




राघव चेतन की बाते सुन कर अलाउद्दीन खिजली ने कुछ ही दिनों में चित्तोड़ राज्य पर आक्रमण करने का मन बना लिया और अपनी एक विशाल सेना चित्तोड़ राज्य पर रवाना कर दी ! अलाउद्दीन खिजली की सेना चित्तोड़ तक पहुच तो गयी पर चित्तोड़ के किले की अभेध्य सुरक्षा देख कर अलाउद्दी खिजली की पूरी सेना स्तब्ध हो गयी ! उन्होंने वही किले के आस -पास अपने पड़ाव डाल लिए और चित्तोड  राज्य के किले की सुरक्षा भेदने का उपाय ढूंढने लगे !


अलाउद्दीन खिजली ने राजा रावल रत्न सिंह को भेजा कपट संदेश 

जब से राजा रावल रत्न सिंह ने रूप सुन्दरी रानी पद्मावती को स्वयबर में जीता था तभी से पद्मावती अपनी सुन्दरता के लिए दूर -दूर तक चर्चा का विषय बनी हुई थी ! इस बात का फायदा उठाते हुए कपटी अलाउद्दीन खिजली ने चित्तोड़ किले के अंदर राजा रावल रत्न सिंह के पास एक सन्देश भिजवाया कि वह रानी पद्मावती की सुन्दरता का बखान सुन कर उनके दीदार के लिए दिल्ली से यहाँ तक आये है और अब एक बार रूप सुन्दरी रानी पद्मावती को दूर से देखने का अवसर चाहते है और वह सिर्फ उसे दूर से एक नजर देखने की ही तम्मना रखते है !



RANI PADMAWATI PART 3

अलाउद्दीन खिजली से मिला राघव चेतन 


अपने अपमान और राज्य से निर्वासित किये जाने पर राघव चेतन बदला लेने पर आमाद हो गया ! अब उसके जीवन का एक ही लक्ष्य रह गया था और वह था चित्तोड़ के महाराज रावल रत्न सिंह का सम्पूर्ण विनाश ! अपने इसी उद्देश्य के साथ वह दिल्ली राज्य चला गया ! वहा जाने का उसका मक्सद दिल्ली के बादशाह अलाउद्दीन खिजली को उक्सा कर चित्तोड़ पर आक्रमण करवा कर अपना प्रतिशोध पूरा करने का था ! 12 वी और 13 वी सदी में दिल्ली की गद्दी पर अलाउद्दीन खिजली का राज था ! उन दिनों दिल्ली के बादशाह से मिलना इतना आसान कार्य नही था ! इसीलिए राघव चेतन दिल्ली के पास स्थित एक जंगल में अपना डेरा डाल कर रहने लगता है क्योकि वह जानता था की दिल्ली का बादशाह अलाउद्दीन खिजली शिकार का शोकिन है और वहा पर उसकी भेंट जरुर अलाउद्दीन खिजली से हो जायेगी ! कुछ दिन इंतजार करने के बाद आखिर उसे सब्र का फल मिल जाता है ! 


एक दिन अलाउद्दीन खिजली अपने खास सुरक्षा कर्मी लड़ाकू दस्ते के साथ घने जंगल में शिकार खेलने पंहुचा ! मोका पाकर ठीक उसी वक्त राघव चेतन अपनी बांसुरी बजाना शुरू करता है ! कुछ ही देर में बांसुरी के सुर बादशाह अलाउद्दीन खिजली और उसके दस्ते के सिपाहियों के कानो में पड़ते है ! अलाउद्दीन खिजली फोरन राघव चेतन को अपने पास बुला लेता है राज दरबार में आ कर अपना हुनर प्रदर्शित करने का प्रस्ताव देता है ! तभी चालाक राघव चेतन अलाउद्दीन खिजली से कहता है !

आप मुझ जैसे साधारण कलाकार को अपने राज दरबार की शोभा बना कर क्या पाएगे, अगर हासिल ही करना है तो अन्य सम्पन्न राज्यों की ओर नजर दोडाइये जहा एक से बढ़ कर एक बेशकीमती नगीने मोजूद है और उन्हें जितना और हासिल करना भी सहज है! 

अलाउद्दीन खिजली राघव चेतन को पहेलियाँ बुझाने की बजाय साफ -साफ़ अपनी बात बताने को कहता है तब राघव चेतन चित्तोड़ राज्य की सैन्य शक्ति,चित्तोड़ गढ़ की सुरक्षा और वहा की सम्पदा से जुड़ा एक-एक राज खोल देता है और राजा रावल रत्न सिंह की धर्म पत्नी रानी पद्मावती के अद्भुत सोन्दर्य का बखान कर देता है ! यह सब बाते जान कर अलाउद्दीन खिजली चित्तोड़ राज्य पर आक्रमण कर के वहा की सम्पदा लुटने , वहा कब्ज़ा करने और परम तेजस्वी रूप की अंबार रानी पद्मावती को हासिल करने का मन बना लेता है !

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रानी पद्मावती का चित्तोड़ राज्य में प्रवेश पार्ट 2

रानी पद्मावती का चित्तोड़ राज्य में प्रवेश 



प्रजा प्रेमी ओर न्याय पालक राजा रावल रत्न सिंह चित्तोड़ राज्य को बड़े कुशल तरीके से चला रहे थे ! उनके शासन में वहा की प्रजा हर तरह से सुखी संपन थी ! राजा रावल रत्न सिंह रण कोशल ओर राजनीति में निपुण थे ! उनका भव्य दरबार एक से बढकर एक महावीर योध्दाओ से भरा हुआ था ! चित्तोड़ की सैन्य शक्ति ओर युध्द कला दूर -दूर तक मशहूर थी !

चित्तोड़ का प्रवीण संगीतकार राघव चेतन 

चित्तोड़ राज्य में राघव चेतन नाम का संगीतकार बहुत प्रसिध्द था ! महाराज रावल रत्न सिंह उन्हें बहुत मानते थे ! इसीलिये राज दरबार में राघव चेतन को विशेष स्थान दिया गया था ! चित्तोड़ की प्रजा और वहा के महाराज को उन दिनों यह बात मालूम नही थी की राघव चेतन संगीत कला के अतिरिक्त जादू -टोना भी जानता था ! ऐसा कहा जाता है की राघव चेतन अपनी इस आसुरी प्रतिभा का उपयोग शत्रु को परास्त करने और अपने कार्य सिध्द करने में करता था ! एक दिन राघव चेतन जब अपना कोई तांत्रिक कार्य कर रहा था तब उसे रंगे हाथो पकड लिया गया और राजदरबार में राजा रावल रत्न सिंह के समक्ष पेश कर दिया गया ! सभी साक्ष्य औरफरियादी पक्ष की दलील सुन कर महाराज ने चेतन राघव को दोषी करार देकर तुरंत उसका मुह काला कर उसे गधे पर बैठा कर अपने राज्य से निकल जाने का आदेश दे दिया ! 



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