चित्तोड़ के महाराज रावल रत्न सिंह का अलाउद्दीन खिजली को जवाब

चित्तोड़ के महाराज रावल रत्न सिंह का अलाउद्दीन       
                    खिलजी  को जवाब                 



अलाउद्दीन खिलजी  की इस अजीब मांग को राजपूत मर्यादा के विरुद्ध बता कर राजा रावल रत्न सिंह ने ठुकरा दिया ! पर फिर भी अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मावती को बहन समान बताया था इसलिए उस समय एक रास्ता निकाला गया ! पर्दे के पीछे रानी पद्मावती सीढियों के पास से गुजरेगी और सामने एक विशाल काय शीशा रखा जायेगा जिसमे रानी पद्मावती का प्रतिबिम्ब अलाउद्दीन खिलजी देख सकते है ! इस तरह राजपुतो की मर्यादा भी भंग ना होगी और अलाउद्दीन खिलजी की बात भी रह जायेगी !


अलाउद्दीन खिलजी ने दिया धोखा 

 शर्त के अनुसार चित्तोड़ के महाराज ने अलाउद्दीन खिलजी को आईने ने रानी पद्मावती का प्रतिबिम्ब दिखला दिया और भीर अलाउद्दीन खिलजी को खिला -पिला कर पूरी महेमान नवाजी के साथ चित्तोड़ किले के सातो दरवाजे पार करा कर उनकी सेना के पास छोड़ने खुद गये ! इसी अवसर का लाभ ले कर कपटी अलाउद्दीन खिलजी ने राजा रावल रत्न सिंह को बंदी बना लिया और किले के बाहर अपनी छावनी में कैद कर दिया ! इसके बाद संदेश भिजवा दिया कि -

अगर महाराज रावल रत्न सिंह को जीवित देखना है तो रानी पद्मावती को तुरंत अलाउद्दीन खिलजी की खिदमद में किले बाहर भेज दिया जाये !