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8.1 Promotion of marathi and sanskrit ( Veer shivaji )

8.1 Promotion of marathi and sanskrit
            ( Veer shivaji )



Though Persian was a common courtly language in the region, Shivaji replaced it with Marathi in his own court, and emphasised Hindu political and courtly traditions.The house of Shivaji was well acquainted with Sanskrit and promoted the language; his father Shahaji had supported scholars such as Jayram Pindye, who prepared Shivaji's seal. Shivaji continued this Sanskrit promotion, giving his forts names such as Sindhudurg, Prachandgarh, and Suvarndurg. He named the Ashta Pradhan (council of ministers) as per Sanskrit nomenclature with terms such as nyayadhish, and senapat, and commissioned the political treatise Rajyavyavahar Kosh. His rajpurohit, Keshav Pandit, was himself a Sanskrit scholar and poet.

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RANI PADMAWATI PART 4

अलाउद्दीन खिजली की चित्तोड़ राज्य पर  आक्रमण                                  की योजना                                                                                                                  



राघव चेतन की बाते सुन कर अलाउद्दीन खिजली ने कुछ ही दिनों में चित्तोड़ राज्य पर आक्रमण करने का मन बना लिया और अपनी एक विशाल सेना चित्तोड़ राज्य पर रवाना कर दी ! अलाउद्दीन खिजली की सेना चित्तोड़ तक पहुच तो गयी पर चित्तोड़ के किले की अभेध्य सुरक्षा देख कर अलाउद्दी खिजली की पूरी सेना स्तब्ध हो गयी ! उन्होंने वही किले के आस -पास अपने पड़ाव डाल लिए और चित्तोड  राज्य के किले की सुरक्षा भेदने का उपाय ढूंढने लगे !


अलाउद्दीन खिजली ने राजा रावल रत्न सिंह को भेजा कपट संदेश 

जब से राजा रावल रत्न सिंह ने रूप सुन्दरी रानी पद्मावती को स्वयबर में जीता था तभी से पद्मावती अपनी सुन्दरता के लिए दूर -दूर तक चर्चा का विषय बनी हुई थी ! इस बात का फायदा उठाते हुए कपटी अलाउद्दीन खिजली ने चित्तोड़ किले के अंदर राजा रावल रत्न सिंह के पास एक सन्देश भिजवाया कि वह रानी पद्मावती की सुन्दरता का बखान सुन कर उनके दीदार के लिए दिल्ली…

VEER SHIVAAJI SUMMARY

VEER SHIVAAJI  (SUMMARY)



shivaji bhonsle (marathi)- छत्रपति शिवाजीराजे भोसले ;(1627/1630 -3 April 1680) was an indian warrior king and a member of the Bhonsle Maratha clan. Shivaji carved out an enclave from the declining Adilshahi sultanate of Bijapur that formed the genesis of the maratha Empire in 1674,he was formally crowned as the chhatrapati (Monarch) of his realm at Raigad. Shivaji established a competent and progressive civil rule with the help of disciplined military and well-structured administrative organisations. He innovated military tactics, pioneering the guerrilla warfare methods (Shiva sutra of ganimi kava),which leveraged strategic factors like geography, speed and surprise and focused pinpoint attacks to defeat his larger and more powerful enemies. From a small contingent of 2000 soldiers inherited from his father, shivaji created a force of 100,000 soldiers; he built and restored strategically located forts both inland and coastal to safeguard his territory. He revi…

RANI PADMAVATI KA PARICHAY PART 1

रानी पद्मावती का परिचय
भारतीय इतिहास के पन्नों  में  अत्यंत  सुंदर और साहसी रानी ;रानी पद्मावती का उल्लेख है रानी पद्मावती को  रानी पद्मनी के नाम से भी जाना जाता है रानी पद्मावती के पिता सिंघल प्रांत (श्रीलंका )के राजा थे ! 
उनका नाम गंधर्वसेन था ! और उनकी माता का नाम चंपावती था ! पद्मावती बाल्य काल से ही दिखने में अत्यंत ही सुन्दर और आकर्षक थी !उनके माता -पिता नें उन्हें बड़े लाड प्यार से बड़ा किया था ! कहा जाता है की बचपन में पद्मावती के पास एक बोलता तोता था जिसका नाम हीरामणि रखा गया  था !



रानी पद्मावती का स्वयंवर 

रानी पद्मावती का स्वयंवर महाराज गंधर्वसेन ने अपनी पुत्री पद्मावती के विवाह के लिए उनका स्वयंवर रचाया था जिसमे भाग लेने के लिए भारत के अलग -अलग हिन्दू राज्यों के राजा-महाराजा आये थे ! 
गंधर्वसेन के राज दरबार में लगी राजा -महाराजाओ की भीड़ में एक छोटे से राज्य का पराक्रमी राजा मल्खान सिंह भी आया था ! उसी स्वयवर में विवाहित राजा रावल रत्न सिंह भी मौजूद थे उन्होंने मल्खान सिंह को स्वयंवर में परास्त कर के रानी पद्मावती पर अपना अधिकार सिध्द किया और उनसे धूम -धाम से विवाह रचा लिया !इस त…